Anuched  Lekhan

anuched lekhan

अनुच्छेद लेखन | Hindi paragraph | anuched lekhan | paragraph writing in Hindi | CBSE class 10 – anuched lekhan

anuched lekhan | अनुच्छेद लेखन, निबंध का ही छोटा रूप है। आप एक निबंध में किसी विषय पर अपने पूर्ण विचार रखते हैं। आपको 300 शब्द से भी ज्यादा लिखने की आज़ादी होती है। और यही कारण है कि उस विषय पर पूर्ण प्रकाश ही पड़ता है।

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पर अनुछेद लेखन anuched lekhan में आप 80 से 100 शब्दों में ही किसी विषय पर अपने विचार प्रकट करते है। अनुछेद लेखन एक ऐसी कला है जिससे किसी विषय से सम्बंधित अपने विचार को एक निर्धारित शब्द सीमा में रहकर अपने बुद्धि बल से प्रकाशित करने की शैली होती है। ये पढ़ने में बड़ा ही अनोखा, रोचक और विषय सम्बंधित जानकारी देने में भी सक्षम होता है।

हिंदी अनुछेद ( Hindi Paragraph) को लिखने से पहले हमें विशेष बातों का ध्यान रखना होता है। CBSE class 10 – anuched lekhan  या ICSE exam में कुछ बातों का तो हमें बड़ी ही एकाग्रता से पालन करना पड़ता है।

आइये हम लेखन सम्बंधित कुछ विशेष बिंदु को जानते है-

  1. यह एक ऐसी लेखन शैली है जो बड़ी ही संछिप्त रूप से लिखी जाती है।
  2. हमें हमेशा मुख्य विषय पर ही ध्यान केंद्रित रखना होगा। बेकार की बातों को न लिखें।
  3. परीक्षा में आपको संकेत बिंदु दिए जाते है। आप इन्ही संकेत बिंदु पर ही लिखने का प्रयास करेंगे ।
  4. आप जानते ही हैं कि शब्द सीमा 80-100 ही होती है और आपको इसका विशेष रूप से ध्यान रखना है।
  5. ये पढ़ने में आकर्षक और अनुभूतिपूर्ण होनी चाहिए ।
  6. आप प्रयास करें कि वाक्य रचना छोटी हो पर वे आपस में जरूर एक दूसरे से जुड़ी होनी चाहिए ।
  7. किसी बात को बिलकुल न दोहराएं क्योकि   इससे आपके शब्द सीमा पर प्रभाव पड़ेगा ।
  8. केवल मुख्य बातों को ही लिखने का प्रयास करें क्योकि शब्द की एक सीमा है।
  9. भाषा को बिलकुल सरल रखें ताकि अनुछेद पूर्ण रूप से प्रभावी बन पाए।
  10. पाठक के लिए रुचिकर बातों का समावेश जरूर करें।
  11. विषय को केंद्र में जरूर रखें ताकि पाठक विषय से भटक न जाये।
  12. आप सूक्ति का प्रयोग कर सकते है। पर विषय से सम्बंधित जरूर हो। ये विषय को अवशय ही प्रभावशाली बनाने में मदद करेगा।
  13. अनुछेद ( Paragraph ) के अंत में निष्कर्ष जरूर लिखने का प्रयास करें । ये वैयाकरणिक दृस्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण होता है और ये अनुछेद को पूर्णता भी प्रदान करती है।

 


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अनुछेद लेखन के कुछ उदाहरण

१। स्वास्थ्य और व्यायाम 

संकेत बिंदु –

  • स्वास्थ्य का महत्त्व
  • शारीरिक स्वास्थ्य के लिए व्यायाम
  • मानसिक स्वास्थ्य
  • निष्कर्ष

एक स्वस्थ शरीर से ही आनंदमय जीवन की शुरुआत होती है। तन मन से स्वस्थ व्यक्ति ही जीवन का आनंद उठा सकता है।

व्यायाम एक ऐसी क्रिया है जो  आपके शरीर को मजबूत करने, आपके तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने और आपकी आंतरिक शक्तियों को तेज करती हैं। व्यायाम निश्चित रूप से आपके शरीर को लाभान्वित करते हैं। व्यायाम करने से मानव शरीर तंदुरूस्त, स्वस्थ, सुंदर और सुडौल बनता है। भौतिक शरीर वाले व्यक्ति को हजारों की भीड़ से आसानी से पहचाना जा सकता है। व्यायाम करने से शरीर का अंग स्वस्थ रहता है। शरीर स्वस्थ और तंदुरुस्त बनता है। आलस्य भाग जाता है। दिन भर ऊर्जा और उत्साह बना रहता है। .

व्यायाम का प्रभाव मन पर भी पड़ता है। शरीर के दुर्बल और रोगी होने से मन भी शिथिल हो जाता है। एक स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन और आत्मा रहती  है। व्यायाम करने के बाद दिमाग तेज हो जाता है। उनके हाथ में जो भी काम होता है, जोश और उत्साह के साथ वह पूरा होता है।

स्वस्थ समाज में स्वस्थ लोग होते हैं। व्यक्ति स्वस्थ और सुखी रहेगा, तो समाज भी स्वस्थ और सुखी रहेगा तथा मजबूत होगा। वह किसी भी बीमारी से लड़ने में सक्षम होंगे। वह पुरे जीवन का आनंद ले सकेंगे।


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२। शहरी जीवन में बढ़ता प्रदुषण 

संकेत बिंदु –

  • शहरीकरण
  • बढ़ती जनसंख्या
  • विविध प्रकार के प्रदुषण
  • प्रदुषण को रोकने के उपाय

 

आज ग्रामीण इलाकों से लोग धीरे-धीरे शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।  जिसके पास मौका होता है वह शहर में बस जाता है । इस वजह से कई छोटे कस्बे कुछ वर्षों में शहर बन गए हैं।

जनसंख्या घनत्व बढ़ने से महानगरों में तरह-तरह के प्रदूषण बढ़ रहे हैं। वही जमीन, वही आसमान, वही नदी, वही पहाड़, लेकिन तीन गुना आबादी यानी तीन गुना उपभोक्ता। इसका सीधा असर बढ़ते प्रदूषण पर पड़ रहा है।

शहरों में प्रदूषण कई तरह से बढ़ रहा है। सबसे भीषण वायु प्रदूषण है। बड़े शहरों में लोग स्वस्थ हवा में सांस नहीं ले सकते। लोगों को सड़क पर चलते समय वाहनों का काला धुंआ पीना पड़ रहा है। भीड़ अधिक होने के कारण जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हैं। फैक्ट्री का धुआं पर्यावरण को जहरीला बनाता है, इसलिए मनुष्य भी स्वच्छ हवा के लिए तरसता है। बड़े शहरों में जल प्रदूषण एक बड़ी समस्या बन गया है। फैक्ट्री का पानी प्रदूषित होने से भूजल भी लाल और काला हो गया। ध्वनि प्रदूषण की वर्तमान स्थिति यह है कि महानगरों के निवासियों के लिए बहरापन और तनाव आम समस्या हो गई है, और शांत स्थानों की जगह शोर ने ले ली है।

इस संबंध में वैज्ञानिक साधनो की तरह आम लोग भी समान रूप से दोषी हैं। हमें प्रदूषण के कारणों और इससे बचने के तरीकों को समझना होगा । लोगों को सचेत करें और उपायों को व्यापक रूप से प्रचारित करें। सरकार और जनता का संयुक्त सहयोग ही प्रदूषण मुक्त वातावरण का निर्माण हो सकता है।


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३। बेरोजगारी : समस्या और समाधान

संकेत बिंदु –

  • अर्थ
  • कारण
  • दुष्परिणाम
  • समस्या का समाधान

 

बेरोजगारी का तात्पर्य योग्य नौकरियों की कमी से है। भारत में बेरोजगारों को मुख्य रूप  से तीन श्रेणियों में बांटा गया है। एक व्यक्ति जिसके पास जीविकोपार्जन का कोई साधन नहीं है। ये पूरी तरह से खाली हैं। दूसरा, जो कुछ समय से काम कर रहे हैं, लेकिन सीजन या काम का समय खत्म होने के बाद बेकार हो जाते हैं। ऐसे लोगों को बेरोजगार कहा जाता है। तीसरे पक्ष ऐसे हैं जिन्हें योग्यता के आधार पर नौकरी नहीं मिली।

बेरोजगारी का मुख्य कारण जनसंख्या विस्फोट है। जनसंख्या वृद्धि के कारण देश में रोजगार सृजन की सारी योजनाएँ बेकार हो गई हैं।  दूसरा कारण पढ़े- लिखे युवको में छोटे काम न करने की लालसा है। बेरोजगारी का तीसरा प्रमुख कारण भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था है। हमारी शिक्षा प्रणाली लगातार नए बेरोजगार लोगों को पैदा कर रही है।

हमारी शिक्षा में पेशेवर प्रशिक्षण का अभाव है।  सरकार को लघु उद्योगों को प्रोत्साहन देना चाहिए। मशीनीकरण की डिग्री को इस हद तक बढ़ाया जाना चाहिए कि इससे रोजगार के अवसर कम न हों। इसलिए गांधी जी ने मशीन का विरोध किया, क्योंकि इसने कई शिल्पकारों के हाथ बेकार कर दिए।

बेरोजगारी के परिणाम भयानक हैं।  बेरोजगार युवा कुछ भी गलत करने को तैयार हैं। वे शांति भंग करने में सबसे आगे हैं। जो लोग सोचते हैं कि शैक्षिक वातावरण धूमिल है, वे शैक्षिक वातावरण को भी चोट पहुँचाते हैं।

जब जनसंख्या की रफ़्तार धीमी होगी तभी बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो सकता है। युवा शारीरिक श्रम करें। सरकार को छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। औद्योगिक प्रशिक्षण, शिक्षा में शामिल हों ताकि युवा आत्मनिर्भर बन पाए ।


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४। भारत का किसान

  • सरल जीवन
  • मेहनती
  • गरीबी
  • दयनीय अवस्था के मूल कारण
  • निष्कर्ष

भारतीय किसान बड़ा ही सरल होता है । वह स्वर्गीय सुख की कामना नहीं करता। वह तो रुखा – सूखा खाकर भी आनंदित रहता है। वह स्वाभाव से ही दयालु और सात्विक मानसिकता का होता है।

एक भारतीय किसान बहुत मेहनती होता है। गर्मी, सर्दी और बारिश के बावजूद वह काम में व्यस्त रहता  हैं। किसान को गरजते बादल या तूफानी हवाएं कोई उसे उसके कर्म करने से नहीं रोक सकती । भारतीय किसानों का जीवन कठिन और चुनौतीपूर्ण होता है। दिन-रात काम करने पर भी वह जीवन की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता है।  उसके पास न तन ढकने के लिए कपड़ा होता है और न ही पर्याप्त भोजन ।

गरीबी और अशिक्षा भारतीय किसानों के पतन का मूल कारण है। शिक्षा की कमी के कारण, वह कई बुराइयों से घिरा हुआ है । अंधविश्वास और रीति-रिवाज उनके जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। आज भी वह शोषण का शिकार है। आपकी मेहनत दूसरों के लिए सुख-समृद्धि लाती है पर खुद अभावग्रस्त है।

देश की प्रगति किसानों के जीवन में सुधार से जुड़ी है। किसान इस देश की आत्मा हैं। इसलिए हमें इसे सुधारने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। किसानों के महत्व को जानकर लाल बहादुर शास्त्री ने “जय जवान जय किसान” का नारा दिया। यदि जवान देश की सीमाओं की रक्षा करता है, तो किसान उस सीमा के भीतर रहने वाले लोगों को समृद्धि प्रदान करते हैं ।


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५। छात्र और अनुसासन 

संकेत बिंदु –

  • महत्त्व
  • पहला अनुसासन का प्रभाव
  • व्यक्ति और समाज पर प्रभाव
  • जीवन पर प्रभाव

 

“अनुशासन” शब्द का अर्थ है -नियमों को व्यवस्था के अनुसार जीना। यदि कोई व्यवस्था तय है, तो उस पर जियो। व्यवस्था ठीक न हो तो जीवन में कोई भी नियम अपने लिए बना लें। अनुशासन जीवन को उपयुक्त बनाता है। इससे दक्षता में सुधार होता है। समय का पूरा सदुपयोग होता है।

पहला अनुशासन अनुशासन का पाठ सबसे पहले परिवार से ही सीखा जाता है। परिवार का सारा काम व्यवस्थित तरीके से होगा तो बच्चा भी अनुशासन पर ध्यान देगा। इसलिए लोगों को पहले अपने घर को अनुशासित करना चाहिए।

अनुशासन न केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए आवश्यक है, बल्कि सामाजिक जीवन के लिए भी नितांत आवश्यक है। व्यक्तिगत जीवन में अनुशासन का अर्थ है कि छात्रों को प्रत्येक कार्य को समय पर और क्रम से पूरा करने की आदत विकसित करनी चाहिए। आपको अपने काम के घंटे निर्धारित करने होंगे। दिनचर्या निश्चित होनी चाहिए।

सामाजिक जीवन में अनुशासन आवश्यक है। जैसे ट्रेन, बस, स्कूल और कार्यालय हमेशा खुले रहते हैं, वैसे ही कर्मचारियों को अपने-अपने स्थानों पर समय पर काम करने के लिए तैयार रहना चाहिए। कोई ढिलाई नहीं होनी चाहिए।  इसके साथ ही विद्यार्थी समय पर सामाजिक कार्यों में भाग लेने के तत्पर हों।

अनुशासन एक महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है, वास्तव में अनुशासन एक प्रकार का स्वभाव है। एक विज्ञान है। अनुशासन का लक्ष्य जीवन को आरामदायक और सुविधाजनक बनाना है। एक अनुशासित व्यक्ति को सुशिक्षित और सभ्य माना जाता है। एक अनुशासित विद्यार्थी अपने जीवन में सफलता तो प्राप्त करता है ही साथ ही साथ समाज में ऊँचा दर्जा भी प्राप्त करता है।


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६। भारतीय संस्कृति : अनेकता में एकता 

संकेत बिंदु –

  • भारतीयता का भाव
  • समानता
  • समान भाषा
  • पहनावा, संस्कृति व् भोजन की भिन्नता में एकता

भारतवर्ष एक विशाल देश है जिसमें कई संस्कृतियां रहती हैं। जैसे नदी अपनी स्वतंत्रता खो कर समुद्र में विलीन हो जाती है, उसी प्रकार भारत में विभिन्न समुदायों को “भारतीय” भी कहा जाता है, भले ही उनकी अपनी विशेषताएं हों। विभिन्न धार्मिक मान्यताओं का पालन करने के बाद भी ये सभी भारतीयों के जीवन में विलीन हो गए।

यह भारतीय विशेषता इस देश को अन्य देशों से अलग करती है। यहां सद्भाव से रहते हुए, आपको सभी क्षेत्रों में मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च मिल जाएंगे। यहां के लोग सभी धर्मों को मानते हैं। सभी धार्मिक अवकाश भी उत्साह के साथ मनाए जाते हैं।   जीवन के सभी क्षेत्रों से भारतीयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

भारतीय संस्कृति की एकता भी इसी भाषा में अभिव्यक्त होती है। हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन के लिए कोई अलग भाषा नहीं है। एक प्रांत के सभी निवासी एक ही भाषा बोलते हैं। राष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी के साथ पूरा देश जुड़ा हुआ है।

भारत के प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग वेशभूषा है। इस तरह के कपड़े जलवायु और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकसित हुए। उदाहरण के लिए, पूरे उत्तर प्रदेश में किसान सिर पर पगड़ी पहनते हैं।

भारत में कई नृत्य शैलियाँ हैं। भरतनाट्यम, ओडिसी, कुचिपुड़, कथकली, मणिपुरी कथक, आदि पारंपरिक नृत्य शैलियाँ हैं, और भगड़ा, गिदा नागा, बिहू, आदि  नृत्य के लोकप्रिय रूप हैं।

पुरे भारत में विचरण करें तो ज्ञात होगा भारत में भोजन की बहुत समृद्ध विविधता है। कहीं दाल-बाटी, तो कहीं चावल और मछली, तो कहीं रोटी-साग,  इडली और डोसा। इस विविधता के बीच एकता का प्रमाण यह है कि आज दक्षिण भारतीयों को दाल और कबाब खाने का उतना ही शौक है जितना उत्तर भारतीय  इडली डोसा खाते हैं। इसी कारण ये विश्वा में आकर्षण का केंद्र बानी हुई है।


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७। भारतीय नारी 

संकेत बिंदु –

  • समर्पण का स्वभाव
  • पश्चिमी नारी
  • भारतीय नारी
  • वर्त्तमान नारी

 

भारतीय नारी का नाम सुनते ही प्रेम, करुणा, दया, त्याग और सेवा की मूर्तियाँ हमारे सामने प्रस्तुत हो जाती  हैं। नारी व्यक्तित्व में सौम्यता और सुंदरता का मिश्रण होता है। यही कारण है कि इसमें प्रेम, करुणा, त्याग आदि गुण अधिक होते हैं। इसी भावना से नारी ने अपना और अपने परिवार का जीवन खुशहाल बनाया।

पश्चिमी देशों में महिलाओं ने अंधी प्रतियोगिताओं में पुरुषों के साथ प्रतिस्पर्धा और प्रगति करना शुरू कर दिया है। वे पैसे की तलाश में पुरुषों के समान व्यवसाय में लगे हुए हैं। उन्हें अपने राग, प्रेम और स्नेह की परवाह नहीं है। कई महिलाएं तो मां बनने पर भी विचार नहीं करती हैं। वह बस अपनी खुशी, सुंदरता और विलासिता में डूबी रहना चाहती है।

भारत ने शुरू से ही महिलाओं के मातृत्व को समझा है। यही कारण है कि यहां हमेशा महिलाओं की पूजा की जाती रही है।भारत में महिलाएं प्राचीन काल में पुरुषों की तरह स्वतंत्र थीं। घुसपैठियों के डर से उसे घर की दीवारों में कैद रहना पड़ा। सैकड़ों वर्षों तक, जब वह घर के काम में लगी हुई थी, लेकिन वर्तमान युग के  बदलते परिवेश में, भारतीय महिलाओं के पास समाज के लिए खुलने का अवसर है,

आज महिलाओं में पढ़ने, लिखने और कुछ करने की इच्छा है। महिलाएं अब शीर्ष पर पहुंच चुकी हैं।  उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। कंप्यूटर विज्ञान के क्षेत्र में इसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।  चिकित्सा शिक्षा और सेवा के क्षेत्र में उनका योगदान असाधारण है। आज कई महिलाएं इंजीनियरिंग, बिजनेस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी सफल हैं। आज भारतीय महिलाओं का गुणगान सारा विश्व  कर रहा है।


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८। पर्यटन का महत्त्व 

संकेत बिंदु –

  • पर्यटन क्या है
  • विकास
  • एक उद्योग के रूप में
  • लाभ और शौक

आनंद के लिए घूमना ही पर्यटन कहलाता है। घूमने वाला प्राणी हमेशा आनंदित रहता है। उसे किसी बात की चिंता नहीं सताती। लोगों का तो यहाँ तक मानना है कि इससे मानसिक रोगी में बहुत सुधार भी देखे जाते हैं।

राहुल सांकृत्यायन ने कहा कि अब तक दुनिया का सारा विकास पथिक की कृपा से हुआ है। जितने भी धर्म विकसित हुए हैं, वे पथिकों की कृपा से विकसित हुए हैं। कोलंबस और वास्को डी गामा ने यात्रा के माध्यम से भारत और अमेरिका की खोज की। आज भी सबसे धनी लोगों का व्यवसाय पूरी दुनिया में फैला हुआ है।

पर्यटन आज एक उद्योग बन गया है। भारत में कई पर्यटक आकर्षण हैं। कश्मीर, कुरु-मनाली, मसूरी, नैनीताल और ऊटी की सुरम्य पहाड़ियां हर साल हजारों पर्यटकों को आकर्षित करती हैं तथा धार्मिक स्थलों पर हर साल लाखों पर्यटक आते हैं। कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और असम में पर्यटन वहां की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ है।

पर्यटन से मानव जाति को कई लाभ होते हैं। पर्यटकों को दुनिया में कई संस्कृतियों से अवगत कराया जाता है। इससे आपको सभी फायदों के बारे में पता चलता है। उनकी दृष्टि व्यापक हो गई। पर्यटन ने दुनिया में आपसी भाईचारा पैदा किया है।

“वसुधैव कुटुम्बकम” का आदर्श वाक्य तभी समझ में आता है जब दुनिया भर के लोग खुद को आपके परिवार का सदस्य मानते हैं। यह केवल पर्यटन के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। आज पर्यटन मनोरंजन का साधन बनता जा रहा है। आम लोग भी अपनी आमदनी का कुछ हिस्सा पर्यटन के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं। पर्यटन वास्तव में लोगों को दैनिक जीवन की परेशानियों से मुक्त करता है। यह मानव जाति को बचाने का एक अच्छा तरीका है।


 

९। समाचार पत्र का महत्त्व

संकेत बिंदु –

  • समाज का सम्बन्ध
  • प्रचार का माध्यम
  • व्यापार में उपयोगी
  • मनोरंजन के लिए

समाचार पत्र हमारे और शेष विश्व के बीच की कड़ी हैं। जब हम अखबार में देशी-विदेशी खबरें पढ़ते हैं तो हम पूरी दुनिया का हिस्सा बन जाते हैं। लोग इसके माध्यम से अपनी इच्छा, विरोध और आलोचना व्यक्त करते हैं।

आज प्रचार का युग है। यदि आप अपने उत्पाद, अपने विचार, अपने कार्यक्रम या अपनी रचना को राष्ट्रीय स्तर पर बनाना चाहते हैं तो अखबार की मदद लें। अखबारों के जरिए लोग रातों-रात नेता या सेलिब्रिटी बन जाते हैं।

व्यापार बढ़ाने में समाचार पत्र काफी मददगार साबित हुए हैं। विज्ञापनों की मदद से व्यवसायों के उत्पाद न केवल देश और विदेश में बेचे जाते हैं। नौकरी तलाशने के लिए समाचार पत्र भी एक अच्छा साधन हैं। सभी बेरोजगारों का सहारा अखबारों में नौकरी के विज्ञापन हैं। वे सभी दलों और महान लोगों के महत्व को समझते हैं।

महिलाएं अपने परिवार को संभालने के नए तरीके सीखती हैं। समाचार पत्रों में अक्सर हमें विभिन्न सूचना और मनोरंजन मीडिया प्रदान करने के लिए ऐसे कई स्थायी कॉलम होते हैं।आज, समाचार पत्रों ने मनोरंजन के क्षेत्र में भी प्रगति की है। इसने नई कहानियाँ, उपाख्यान, कविताएँ और अन्य बाल साहित्य प्रकाशित किए। वास्तव में आज के समाचार पत्र बहुमुखी हो गए हैं।

आज अखबार के माध्यम से मनचाहा वर-वधू ढूंढ सकते हैं। आप घर, कार, वाहन खरीद और बेच सकते हैं। आप खोए हुए भाई को बुला सकते हैं। आप अपनी परीक्षा का परिणाम जान सकते हैं। इसलिए समाचार पत्रों का महत्व बहुत अधिक हो गया है।


 

१०। आदर्श विद्यार्थी 

संकेत बिंदु –

  • अर्थ
  • जानने की इच्छा
  • परिश्रमी
  • अनुशासित

विद्या का अर्जन करने वाला ही विद्यार्थी कहलाता है। इसके मन में सीखने की लालसा होती है। वह ज्ञान का प्यासा होता है।

छात्रों का पहला गुण जिज्ञासा है। आपको हमेशा नए विषयों के बारे में नई  जानकारी की आवश्यकता होती है। वह न केवल पुस्तकों और शिक्षकों पर निर्भर करता है, वह अपने प्रयासों से ज्ञान प्राप्त करता है। एक सच्चा छात्र आस्तिक होता है। एक वास्तविक छात्र सांसारिक सुख और आराम में विश्वास नहीं करेगा।

आदर्श विद्यार्थी प्रयास, दृढ़ता और पश्चाताप को आग की लपटों में पिघलाकर सोना बनाता है। आराम और सुविधा के जाल में फंसने वाले छात्र अपने जीवन की नींव को कमजोर कर देते हैं।  आदर्श छात्र अपना दैनिक जीवन स्वयं निर्धारित करेगा और उसका सख्ती से पालन करेगा। अपने अध्ययन, खेल, व्यायाम, मनोरंजन और अन्य गतिविधियों का समन्वय करें।

वह खेल और व्यायाम का एक निश्चित कार्यक्रम भी रखता है। एक आदर्श छात्र का साधारण जीवन ही होता है , जो फैशन और आकर्षण की दुनिया से बहुत दूर है। वह अपने मन  में ऊंचे विचारों के साथ एक मौलिक  जीवन जीता है। वे छात्र जो श्रृंगार पसंद करते हैं, वे अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। वे अपने मुकाम तक कभी पहुंच नहीं पाते ।


 

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