Hindi Barakhadi

Hindi Barakhadi 

Barakhadi | बारहखड़ी |  Barakhadi in Hindi

Hindi barakhadi, यह ब्लॉग हिंदी भाषा विभिन्न आयामों में से एक है, जो हमें हिंदी सीखने के दौरान एक महत्त्व पूर्ण भूमिका निभाता है। यह प्रयास के द्वारा ही सीखा जा सकता है।मानव शरीर वे सभी अवयव जो बोलने के काम में प्रयुक्त है कि पर होते हैं, उन सभी समूहों को वाक्-यंत्र, ध्वनि यंत्र, वागेन्द्रियाँ कहा जाता है।

इन सभी अवयवों की सहायता से अनेकों प्रकार की ध्वनियों का उच्चारण करना सहज हो जाता है। मुख्य ध्वनि अवयव हैं-श्वास नलिका, कोमल तालु, उपालि जिह्वा, कंठ, वर्ल्स, कठोर रूप अंतर्राएं तालु. मूर्धा, नासिका, ओष्ठ आदि।

इन अवयवों की सहायता से निर्गत श्वास ध्वनि में परिवर्तित हो जाती है।जब हम स्वरों की मात्राएँ व्यंजनों पर लगते हैं, तो उसे बारहखड़ी barakhadi  कहते हैं। नीचे दी गई hindi barakhadi (हिंदी बारहखड़ी) का उच्चारण कीजिये ।

Hindi barakhadi : Hindi barakhadi chart  पढ़े


 

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बारहखड़ी – “क”

क का किकीकुकू 
के कैको कौकंकः

बारहखड़ी – ” ख”

खाखिखीखुखू
खेखैखो  खौखंखः 

बारहखड़ी – ” ग “

ग गागिगी गु गू
गे गैगोगौ गंगः

बारहखड़ी – ” घ “

घ घाघिघीघु घू 
घे
घैघोघौघंघः

बारहखड़ी – ” च “

च चाचिचीचुचू
चेचैचोचौचंचः

 


बारहखड़ी – ” छ “

छ छाछिछीछुछू
छेछैछोछौछंछः

बारहखड़ी – ” ज “

ज जा जिजीजुजू
जे जैजो जौजंजः

Hindi barakhadi |   हिंदी बारहखड़ी  | barakhadi

बारहखड़ी – ” झ “

झ झा झिझीझु झू 
झे झैझोझौ
झंझः 

बारहखड़ी – ” ट “

ट टाटिटीटुटू
टेटैटोटौ
टंटः

बारहखड़ी – ” ठ “

ठ ठाठिठीठु ठू
ठेठैठोठौठंठः

बारहखड़ी – ” ड “

ड डा डिडीडुडू
डेडैडोडौ
डंडः

बारहखड़ी – ” ढ “

ढा
ढिढीढुढू
ढेढैढोढौढंढः

बारहखड़ी – ” ण “

णाणिणीणुणू
णेणैणोणौणंणः

 


बारहखड़ी – ” त “

त तातितीतुतू
तेतै तोतौतंतः

बारहखड़ी – ” थ “

थ थाथिथीथुथू 
थे थैथोथौथंथः

बारहखड़ी – ” द “

द दादिदी दुदू
देदैदोदौदंदः

बारहखड़ी – ” ध “

धाधिधीधु धू
धेधैधो धौधंधः

बारहखड़ी – ” न  “

न ना निनी नुनू
ने नै नो नौ नं नः

Hindi barakhadi |   हिंदी बारहखड़ी | hindi barakhadi full

बारहखड़ी – ” प “

प पापि पीपु पू
पे पैपो पौपंपः

बारहखड़ी – ” फ “

फ फाफिफीफु फू
फे पैफ़ो फौ फंफः

बारहखड़ी – ” ब “

ब बा बिबीबुबू
बे बैबो बौ बंबः

बारहखड़ी – ” भ “

भ भाभि भीभूभु
भेभैभो भौभंभः

बारहखड़ी – ” म “

म मामि मीमु मू
में मैमो मौ मंमः

बारहखड़ी – ” य “

य या यियीयु यू
ये यैयो यौयंयः

बारहखड़ी – ” र “

र रा रिरीरु रू
रे रैरो रौ रंरः

Hindi barakhadi |   हिंदी बारहखड़ी | barakhadi hindi chart

बारहखड़ी – ” ल “

ल ला लिलीलुलू
ले लैलो लौ लं लः

बारहखड़ी – ” व “

व वावि वीवुवू
वे वैवो वौवंवः 

बारहखड़ी – ” श “

श शाशिशीशु शू
शेशैशोशौशंशः

Hindi barakhadi |   हिंदी बारहखड़ी | barakhadi hindi

बारहखड़ी – ” स “

स सा सिसीसु सू
से सैसो सौ सं सः

बारहखड़ी – ” ह “

ह हाहिहीहु हू
हे है हो हौहं हः

बारहखड़ी – ” क्ष “

क्षक्षाक्षिक्षीक्षुक्षू
क्षेक्षैक्षोक्षौक्षंक्षः

बारहखड़ी – ” त्र “

त्रत्रात्रित्रीत्रुत्रू
त्रेत्रैत्रोत्रौत्रंत्रः

बारहखड़ी – ” ज्ञ “

ज्ञज्ञाज्ञिज्ञीज्ञुज्ञू
ज्ञेज्ञैज्ञोज्ञौज्ञंज्ञः

बारहखड़ी – ” श्र “

श्रश्राश्रिश्रीश्रुश्रू
श्रेश्रैश्रोश्रौश्रंश्रः

Hindi barakhadi |   हिंदी बारहखड़ी | hindi barakhadi words 


भाषा संरचना
की इकाइयों के अभाव में किसी भी प्रकार की भाषा का ज्ञान प्राप्त करना असंभव होता है, जिसके फलस्वरूप हम भाषा के आदर्श रूप से वंचित रह जाते हैं। गांव और कस्बों में रहने वाले अपने वार्तालाप में मानक हिन्दी का प्रयोग नहीं कर पाते हैं, वे लोग अपनी ही भाषा का प्रयोग करते हैं।

इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करने का कारण उनका अशिक्षित होना है। इस प्रकार के लोग हिन्दी के औपचारिक रूप यानि उसके लिखित रूप से भी वंचित रहते हैं। समाज में ऐसे बहुत ही कम लोग हैं, जो भाषा के आदर्श रूपों से परिचित हों।

हिन्दी का मानक रूप भाषा के विकास का विस्तार करने में काफी सहायता प्रदान करता है। भाषा के विकास का प्रमाण उसकी लिखित सामग्री होती है। किसी भी प्रकार की भाषा के विकास का मापदण्ड उसका व्याकरण उपलब्ध होना है। मानक रूप में व्याकरणसम्म भाषा को उसका वास्तविक रूप माना जाता है, जिसका प्रयोग लेखन और औपचारिक संदर्भों में किया जाता है।

ये सभी संरचनात्मक इकाइयाँ होती हैं। भाषा समुदाय के सभी सदस्य भाषा के विविध रूपों का प्रयोग करना जानते हैं। हमारे जीवन में भाषा व्यवहार का काफी महत्त्व होता है। ऐसे लोगों (सदस्यों)
की संख्या काफी कम होती है, जो भाषा व्यवस्था पर पर्याप्त अधिकार रखते हैं।

इसके पश्चात भी मानक भाषा का प्रयोग व्याकरण में अभीष्ट माना जाता है; जैसे-पाठ्य-पुस्तकों का माध्यम, साहित्य लेखन आदि। मानक भाषा की सम्पूर्ण जानकारी अर्जित करके हम औपचारिक भाषा व्यवहार को और भी ज्यादा प्रभावशाली समर्थ बना सकते हैं।


Hindi barakhadi 

संछिप्त  हिंदी परिचय -वह छोटी से छोटी मूल ध्वनि जिसके खंड न हो सकें, वर्ण कहलाती है। यह भाषा की ऐसी इकाई है जिसके टुकड़े नहीं हो सकते। जैसे- अ, क, ज्, त्, म्, न् आदि। वर्णों के समूह को वर्णमाला कहते हैं। हिन्दी वर्णमाला में कुल 49 वर्ण हैं। इनमें 11 स्वर, 33 व्यंजन, 2 अयोगवाह और 3 संयुक्ताक्षर हैं।

  • स्वरों की सहायता से जिन वर्णों का उच्चारण होता है, वे व्यञ्जन वर्ण होते हैं।
  • उच्चारण स्थान के अनुसार इन्हें पाँच भागों में बाँटा गया है। • कण्ठ, तालु, दन्त और ओष्ठ के स्पर्श से बोले जाने वाले वर्ण ‘स्पर्श’ व्यञ्जन; जैसे- क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, ब, भ, म
  • जीभ, तालु, दाँत और ओष्ठ को आपस में मिलाकर (स्पर्श न करते हुए) बोले न जाने वाले वर्ण ‘अन्तःस्थ’ व्यञ्जन होते हैं, जैसे—य, र, ल, व।
  • जिन वर्णों का उच्चारण ‘ऊष्म वायु’ अर्थात् घर्षण या रगड़ से होता है, ऊष्म व्यञ्जन होते हैं, यथा-श, ष, स, ह
  • जिन वर्णों के बोलते समय मुँह से कम श्वास निकले हैं, वे ‘अल्पप्राण’ तथा जिनके बोलते समय अधिक श्वास निकले हैं, वे ‘महाप्राण’ वर्ण कहे जाते हैं। क, ग, ङ, च, ज, ञ, ट, ड, ण, त, द, न, प, ब, म, य, र, ल, व (अल्पप्राण) तथा ख, घ, छ, झ,
  • ठ, ढ, थ, ध, फ, भ, श, ष, स, ह (महाप्राण) वर्ण । • उच्चारण होते समय ‘स्वरतन्त्री’ झंकृत होती हैं, ‘वे घोष वर्ण’ तथा जिनमें ‘स्वरतन्त्री’ झंकृत न हो, वे ‘अघोष’ व्यञ्जन होते हैं।
  • घोष (ग, घ, ङ, ज, झ, ञ, ड, द, ण, ढ, ध, न, ब, भ, म, य, र, ल, व, ह), अघोष (क, ख, च, छ, ट, ठ, त, थ, प, फ, श, ष, स) ।
  • व्यञ्जन वर्णों की संख्या 39 है। • इस प्रकार स्वर तथा व्यञ्जन, कुल वर्णों की संख्या 52 हैं।

 

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